
21 साल बाद इतिहास: अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश फाइनल में पहुंचीं
स्पोर्ट्स डेस्क | CGBreakingNews.in
भारतीय खेल जगत के लिए एक और गर्व का क्षण सामने आया है। देश की उभरती हुई स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसका इंतजार भारतीय खेल प्रेमी पिछले 21 वर्षों से कर रहे थे। महज 18 साल की उम्र में अनाहत ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। अब पूरा देश उनकी ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है, क्योंकि अगर वह फाइनल जीत जाती हैं तो भारत को पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का महिला खिताब मिलेगा।
यह उपलब्धि सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि भारतीय स्क्वैश के सुनहरे भविष्य की कहानी भी बयां करती है।

सेमीफाइनल में मिस्र की खिलाड़ी को हराकर किया कमाल
कनाडा के ओंटारियो में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में अनाहत सिंह ने मिस्र की मजबूत खिलाड़ी बार्ब सामेह को 11-3, 8-11, 11-4 और 11-6 से मात दी।
मुकाबले की शुरुआत से ही अनाहत ने शानदार लय दिखाई। पहले गेम में उन्होंने आक्रामक खेल दिखाते हुए आसानी से बढ़त बनाई। दूसरे गेम में मिस्र की खिलाड़ी ने वापसी जरूर की, लेकिन भारतीय स्टार ने संयम नहीं खोया। तीसरे और चौथे गेम में अनाहत ने अपने बेहतरीन फुटवर्क, सटीक शॉट्स और आत्मविश्वास से मैच अपने नाम कर लिया।
जैसे ही निर्णायक अंक उनके खाते में आया, पूरे स्टेडियम में भारतीय तिरंगा लहराने लगा और अनाहत की खुशी देखने लायक थी।
21 साल बाद दोहराई भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि

वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के महिला वर्ग के फाइनल में पहुंचने वाली अनाहत सिंह 21 साल बाद पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं।
इससे पहले वर्ष 2005 में भारतीय दिग्गज खिलाड़ी जोशना चिनप्पा ने यह उपलब्धि हासिल की थी। उसके बाद कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आए, लेकिन कोई भी फाइनल तक नहीं पहुंच सका।
अब अनाहत ने इस लंबे इंतजार को खत्म कर देशवासियों को एक नई उम्मीद दी है।
पहले भी बना चुकी हैं कई रिकॉर्ड
अनाहत सिंह पिछले कुछ वर्षों से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। वह पहले ही लगातार दो बार वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन चुकी हैं।
साल 2025 में उन्होंने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। अब उन्होंने उससे भी बड़ा कदम उठाते हुए फाइनल में जगह बनाई है।
यह सफर दिखाता है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी खिलाड़ी दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंच सकता है।
अब निगाहें फाइनल मुकाबले पर
अब अनाहत सिंह का सामना फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीय खिलाड़ी रुकैया सलेम से होगा।

मिस्र लंबे समय से विश्व स्क्वैश पर अपना दबदबा बनाए हुए है, इसलिए यह मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा। लेकिन जिस आत्मविश्वास और शानदार फॉर्म में अनाहत खेल रही हैं, उसे देखते हुए भारतीय प्रशंसकों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं।
यदि अनाहत यह मुकाबला जीत जाती हैं, तो वह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन जाएंगी।
युवा खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा
आज के समय में जब क्रिकेट को सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिलती है, ऐसे में स्क्वैश जैसे खेल में विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

अनाहत सिंह की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे-छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो दुनिया की कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़

अनाहत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है। खेल प्रेमी, पूर्व खिलाड़ी और कई खेल संगठनों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए फाइनल मुकाबले के लिए जीत की कामना की है।
हर भारतीय चाहता है कि अनाहत अपने शानदार प्रदर्शन को फाइनल में भी दोहराएं और देश के लिए नया इतिहास लिखें।
भारत को अब स्वर्णिम पल का इंतजार
पिछले 21 वर्षों का इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है। अनाहत सिंह ने फाइनल तक पहुंचकर यह साबित कर दिया है कि भारतीय स्क्वैश अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

अब सिर्फ एक जीत पूरे देश के सपने को साकार कर सकती है। करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें अनाहत सिंह के साथ हैं। यदि वह फाइनल जीतती हैं, तो यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं होगी, बल्कि भारतीय खेल इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज होने वाला एक नया अध्याय होगी।